यीशु ही परमेश्वर का एकमात्र उपाय हैं।

परमेश्वर लोगों को दंड देना नहीं चाहते। वे रिश्ता फिर से जोड़ना चाहते हैं। परमेश्वर लोगों से इतना प्रेम करते हैं कि वे स्वयं समाधान लेकर आए। हमसे प्रेम के कारण उन्होंने यीशु को पृथ्वी पर भेजा। जो सारी सज़ा हमें मिलनी चाहिए थी, वह यीशु पर आ गई। यीशु ने क्रूस पर मरकर अपनी इच्छा से हमारी सज़ा अपने ऊपर ले ली। यीशु मरे हुओं में से फिर जी उठे। वे पाप और मृत्यु पर विजयी हैं। इस तरह यीशु ने परमेश्वर और मनुष्यों के बीच की दूरी को दूर कर दिया।

"परमेश्‍वर ने संसार से इतना प्रेम किया कि उसने उसके लिए अपने एकलौते पुत्र को अर्पित कर दिया, जिससे जो कोई उस में विश्‍वास करता है, वह नष्‍ट न हो, बल्‍कि शाश्‍वत जीवन प्राप्‍त करे।" (यूहन्ना 3:16)